





Artist
Shyam Bihari Das & Jayshree Devi Dasi
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Shyam Bihari Das & Jayshree Devi Dasi
Lyrics
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Composer
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Genre
Orchestral Rock
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Theme
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Label
Sanatana Sankirtan
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Sanatana Sankirtan
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Sanatana Sankirtan
0:00/1:34
Saras Kishori
Shyam Bihari Das & Jayshree Devi Dasi


Saras Kishori
Saras Kishori
Shyam Bihari Das & Jayshree Devi Dasi
0:00/1:34
About Song
About Song
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Lyrics
Lyrics
Lyrics
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Shri Radhe, keeje kripa ki kor.
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
(हे प्रेमरस से युक्त किशोरी जी! हे किशोर अवस्था वाली राधिके! हे प्रेमरस में सराबोर वृषभानुदुलारी! मेरे ऊपर भी कृपा की दृष्टि करो।)
Saadhan-heen, deen main Radhe, tum karunamayi prem agaadhe,
साधन-हीन, दीन मैं राधे, तुम करुणामयी प्रेम अगाधे,
Kaake dwaare, jaay pukaare, kaun nihaare, deen dukhi ki or.
काके द्वारे, जाय पुकारे, कौन निहारे, दीन दुःखी की ओर।
(हे किशोरी जी! मैं समस्त साधनों से रहित एवं अकिंचन हूँ और तुम अगाध- प्रेम वाली अकारण-करुण हो फिर हम तुम्हें छोड़कर किसके यहाँ अपना दुःख सुनाने जायें? यदि जायें भी तो मुझ सरीखे अधम की ओर कौन देखेगा?)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Karat aghan nahin nek ughaaoon, bhajan karan mein naa man ko lagaaoon,
करत अघन नहीं नेक उघाऊँ, भजन करन में ना मन को लगाऊँ,
Kari barjori, lakh nij ori, tum binu mori, kaun sudhaare dor.
करी बरजोरी, लखि निज ओरि, तुम बिनु मोरी, कौन सुधारे दोर।
(हे किशोरी जी! निरन्तर पापों को करते हुए मेरा पेट कभी नहीं भरता एवं शूकर की भाँति सदा भटकता हुआ विषय रूपी विष्ठा को ही खोजा करता हूँ।हे किशोरी जी! तुम्हारे बिना दूसरा कौन है जो अपनी अकारण कृपा से बरबस मेरी बिगड़ी बना दे।)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Bhalo buro jaiso hoon tiharo, tum binu kou na hitu hamaaro,
भलो बुरो जैसो हूँ तिहारो, तुम बिनु कोउ न हितु हमारो,
Bhanu-dulaari, sudhi lo hamaari, sharan tihari, haun patitan siramore.
भानुदुलारी, सुधि लो हमारी, शरण तिहारी, हौं पतितन सिरमोर।
(हे वृषभानुनंदिनी! मैं भला-बुरा जैसा भी हूँ तुम्हारा ही तो हूँ। तुम्हारे बिना मेरा हितैषी दूसरा है ही कौन?
हे भानुदुलारी! यद्यपि हम पतितों के सरदार हैं फिर भी अब तुम्हारी शरण में आ गये हैं। हमारे ऊपर कृपा करो।)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Gopi prem ki bhiksha deejai, kaisehu mohi apni kari leejai,
गोपी-प्रेम की भिक्षा दीजै, कैसेहुँ मोहिं अपनी करि लीजै,
Tav gun gaavat, divas bitaavat, hriday bhar aavat, bahave prem vibhor.
तव गुन गावत, दिवस बितावत, हृदय भर आवत, बहवे प्रेम विभोर।
(हे रासेश्वरी! मुझे किसी प्रकार भी गोपी-प्रेम की भीख देकर अपनी बना लो
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
(Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare)
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
(Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare)
जिससे मैं तुम्हारे प्रेम में पागल होकर, तुम्हारे गुणों को गाते हुए एवं आँखों से आँसू बहाते हुए अपना जीवन व्यतीत करूँ।)
Paay tiharo prem Kishori, chakke premras Braj ki khori,
पाय तिहारो प्रेम किशोरी, छके प्रेमरस ब्रज की खोरी,
Gati gajgaamini, chhavi abhiramini, lakh nij swaamini, bane ‘Kripalu’ chakor.
गति गजगामिनि, छवि अभिरामिनी, लखि निज स्वामिनी, बने ‘कृपालु’ चकोर।
(सुन्दरता से भी अधिक सुन्दर, मतवाले हाथी के समान चाल वाली अपनी स्वामिनी को देखकर ‘श्री कृपालु जी' कहते हैं कि मेरी आँखें कब चकोर के समान रूपमाधुरी का पान करेंगी?)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Shri Radhe, keeje kripa ki kor.
श्री राधे, कीजै कृपा की कोर।
(हे प्रेमरस से युक्त किशोरी जी! हे किशोर अवस्था वाली राधिके! हे प्रेमरस में सराबोर वृषभानुदुलारी! मेरे ऊपर भी कृपा की दृष्टि करो।)
Saadhan-heen, deen main Radhe, tum karunamayi prem agaadhe,
साधन-हीन, दीन मैं राधे, तुम करुणामयी प्रेम अगाधे,
Kaake dwaare, jaay pukaare, kaun nihaare, deen dukhi ki or.
काके द्वारे, जाय पुकारे, कौन निहारे, दीन दुःखी की ओर।
(हे किशोरी जी! मैं समस्त साधनों से रहित एवं अकिंचन हूँ और तुम अगाध- प्रेम वाली अकारण-करुण हो फिर हम तुम्हें छोड़कर किसके यहाँ अपना दुःख सुनाने जायें? यदि जायें भी तो मुझ सरीखे अधम की ओर कौन देखेगा?)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Karat aghan nahin nek ughaaoon, bhajan karan mein naa man ko lagaaoon,
करत अघन नहीं नेक उघाऊँ, भजन करन में ना मन को लगाऊँ,
Kari barjori, lakh nij ori, tum binu mori, kaun sudhaare dor.
करी बरजोरी, लखि निज ओरि, तुम बिनु मोरी, कौन सुधारे दोर।
(हे किशोरी जी! निरन्तर पापों को करते हुए मेरा पेट कभी नहीं भरता एवं शूकर की भाँति सदा भटकता हुआ विषय रूपी विष्ठा को ही खोजा करता हूँ।हे किशोरी जी! तुम्हारे बिना दूसरा कौन है जो अपनी अकारण कृपा से बरबस मेरी बिगड़ी बना दे।)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Bhalo buro jaiso hoon tiharo, tum binu kou na hitu hamaaro,
भलो बुरो जैसो हूँ तिहारो, तुम बिनु कोउ न हितु हमारो,
Bhanu-dulaari, sudhi lo hamaari, sharan tihari, haun patitan siramore.
भानुदुलारी, सुधि लो हमारी, शरण तिहारी, हौं पतितन सिरमोर।
(हे वृषभानुनंदिनी! मैं भला-बुरा जैसा भी हूँ तुम्हारा ही तो हूँ। तुम्हारे बिना मेरा हितैषी दूसरा है ही कौन?
हे भानुदुलारी! यद्यपि हम पतितों के सरदार हैं फिर भी अब तुम्हारी शरण में आ गये हैं। हमारे ऊपर कृपा करो।)
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
Gopi prem ki bhiksha deejai, kaisehu mohi apni kari leejai,
गोपी-प्रेम की भिक्षा दीजै, कैसेहुँ मोहिं अपनी करि लीजै,
Tav gun gaavat, divas bitaavat, hriday bhar aavat, bahave prem vibhor.
तव गुन गावत, दिवस बितावत, हृदय भर आवत, बहवे प्रेम विभोर।
(हे रासेश्वरी! मुझे किसी प्रकार भी गोपी-प्रेम की भीख देकर अपनी बना लो
Saras Kishori, vayas ki thori, rati ras bhori, keeje kripa ki kor.
सरस किशोरी, वयस की थोरी, रति रस भोरी, कीजै कृपा की कोर।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
(Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare)
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
(Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare)
जिससे मैं तुम्हारे प्रेम में पागल होकर, तुम्हारे गुणों को गाते हुए एवं आँखों से आँसू बहाते हुए अपना जीवन व्यतीत करूँ।)
Paay tiharo prem Kishori, chakke premras Braj ki khori,
पाय तिहारो प्रेम किशोरी, छके प्रेमरस ब्रज की खोरी,
Gati gajgaamini, chhavi abhiramini, lakh nij swaamini, bane ‘Kripalu’ chakor.
गति गजगामिनि, छवि अभिरामिनी, लखि निज स्वामिनी, बने ‘कृपालु’ चकोर।
(सुन्दरता से भी अधिक सुन्दर, मतवाले हाथी के समान चाल वाली अपनी स्वामिनी को देखकर ‘श्री कृपालु जी' कहते हैं कि मेरी आँखें कब चकोर के समान रूपमाधुरी का पान करेंगी?)
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